My name is Mohammad Aashir Hussain. I am a graduate of Delhi University, and a small school teacher, my professional life is surrounded by Philosophy, all brief research of Islam religion and their facts, Ghazals of Urdu Mushaira, Poetry, Shayari, and books of high level of education. Is. I express my own views. And with this I present to you some important parts of my experience, I hope you guys will be showered with love like this. ★彡[Professor]彡★
सोमवार, 26 सितंबर 2022
एक दिन....!🥰
शनिवार, 24 सितंबर 2022
हो सकता है.....
शुक्रवार, 23 सितंबर 2022
Invitation Graduational Ceremony 👨🏻🎓💐
Dear Mohammad Aashir Hussain
University Roll no. 1901****0091
Examination Roll No- 19******6971,
Sol registration- 19-1-16-054398
Username- @jamsheedariyaaz
Selected college on ceremony- Swami shraddhanad college (University of Delhi-110006)
Your Ceremony I'd-6973
Kindly follow the guidelines implemented by the university and enjoy the graduation ceremony.
You are invited to the Graduate Ceremony at University of Delhi.
Keeping in view the performance of your better exam results, invites you and the successful candidates in the final year examination of the year 2022.
University of Delhi Many many congratulations to all of you on behalf of the annual examination result and also best wishes for your good and golden future.
Hope you will imagine a better future after graduation from University of Delhi international Admissions
You have graced the college and university with good results.
We hope that you will achieve success with such hard work and dedication.
Delhi University Invitation to graduation ceremony will be sent to you by email, fax, or post.
Greetings to the graduation ceremony of the year 2022 and Delhi University wishes you all the best for your bright future.
~ Delhi University
बुधवार, 21 सितंबर 2022
ये कैसा.....
कुछ अनकहे तथ्य.....
मंगलवार, 20 सितंबर 2022
मुझे याद है....
अनकहे जज़्बात 📚
बिखरता वजूद😔
में अब तुमसे बात नहीं करता!
तुम्हें पुकारता भी नहीं हूं!
में नहीं कहता कि तुम्हें जब वक्त मिले तो मुझसे राब्ता क्यों नहीं करती!
में नहीं कहता अभी रुक जाओ! अभी मत जाओ!
मुझे नींद नहीं आ रही तो तुम भी मत सो!
में तो अब तुम्हारे सामने भी नहीं आता! जाने कब से मेने तुम्हें पुकारा नहीं, तुम्हें सदाएं नहीं दी! जाने कब से तुम्हें एक नज़र देखा नहीं!
तुम्हारा नाम लिया!
वो जो तुम्हें बेबाक नामों से पुकारा करता था, वो अब ख़ामोश है! बिल्कुल ख़ामोश!
तुमसे लड़ता भी नहीं!
कोई शिकवा ना ही कोई शिकायत, कुछ भी तो नहीं करता!
में अब कहां कहता हूं....
तुम सिर्फ़ मेरी हो! सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरी!
में अब कहां किसी से भी लड़ता हूं!
कहां किसी से भी छीनता हूं! कब किसी से कहता हूं कि तुमपे सिर्फ़ मेरा हक़ है!
सब कुछ छोड़ चुका हूं! यहां तक कि तुम्हें याद करना भी छोड़ दिया!
छोड़ दिया तुम्हें तुम्हारे हाल पर! छोड़ दिया तुमसे लड़ना झगड़ना!
हां मगर........
तुम आज भी मेरी दुआओं के दायरे में हो! अब भी आयत-उल-कुर्सी पढ़ कर तुम्हें दम करता हूं! अब भी कई कई घंटों तुम्हें सोचता हूं!
क्योंकि में आज भी तुमसे मोहब्बत करना नहीं छोड़ सका!
अब भी नहीं छोड़ सका तुम्हें चाहना, तुमसे मोहब्बत करना!
आज भी तुमसे मोहब्बत के मामले में शिद्दत पसंद हूं!
आज भी तुमसे मोहब्बत करने में वैसा ही जुनूनी हूं!
मगर अब ख़ामोश हूं!
बिल्कुल ख़ामोश....!😔😞
~वाहियात फिलोसॉफर
अनकहे जज़्बात 📚
वाहियात फिलॉस्फी
शायरी संग्रह
सयाने कहते हैं....
शनिवार, 17 सितंबर 2022
~वाहियात शायर💐
वो अक्सर मुझसे कहती थी....📚
वो अक्सर मुझसे कहती थी!
मुझे मत इस कदर चाहो, कि में एक आम सी/नॉर्मल लड़की हूं! तुम्हारी आदतों सी कोई भी आदत नहीं है मुझमें....✨
ना शे'र-ओ-शा'इरी से कुछ लगाव है, ना मौसम मेरे दिल को बहुत बेचैन करते हैं, ना बूंदों में मुझे मधुरता (Melodiousness) मेहसूस होती है, ना
मुझे चांद रातों का जादू पागल बनाता है! तुम्हारी आदतों सी कोई भी आदत नहीं है मुझ में! मुझे मत इस क़दर चाहो! वो अक्सर मुझसे कहती थी.....!
मगर!🍂
उसकी निगाहों से ये सच्चाई झलकती थी, अगर'चे एक भी आदत मेरी-उसकी नहीं मिलती मगर एक मुश्तरक (Common) जज़्बा जो हम में सांस लेता है, उसे मेहसूस होता है।🔥
उसे मेरी, मेरे होने, मेरी चाहत चाहत की आदत है! उसे मुझसे बहुत ज्यादा-बहुत ज्यादा मोहब्बत है।✨
मुझे वो आम, निर्मल सी लड़की बहुत ख़ास लगती है। जिसे ना शायरी से कुछ लगाव है और ना मौसम उसे बेचैन रखते हैं।✨
उसे केसे बताऊं में....
कि में लफ़्ज़ों में उसकी हर अदा तस्वीर (Imagine) करता हूं! में जो शायरी, आर्टिकल्स, फिलॉस्फी तहरीर करता हूं, उसे तहरीर करता हूं!🤩
मुझे उसके हर एक मौसम, हर एक आदत की आदत है....!
मुझे उससे बहुत ज्यादा-बहुत ज्यादा मोहब्बत है! में उसकी चाहता हूं तो मेरी तकमील (The act of completion) होती है।🥰
उसे ना चाहकर ख़ुद को अधूरा किस तरह कर लूं!
में आख़िर किस तरह दिल को ग़मों की आग से भर लूं! उसे एक पल जो ना सोचूं, तो जैसे सांस रुक जाए!
में केसे खुदकुशी कर लूं....!🥀💐
~वाहियात फिलोसॉफर
शायरियां 📌
मेरे पास से जो गुज़री, मेरा हाल तक ना पूछा, में केसे मां जाऊं वो दूर जाकर रोई....
तेरे पास से जो गुज़रे रो जुनून में थे "फ़राज" जब दूर जाके सोचा, तो ज़ार-ज़ार रोई....!😞😔
~वाहियात शायर
गुरुवार, 15 सितंबर 2022
अगर में....
में नहीं चाहता कि....
में नहीं चाहता कि,
मेरी मां हर शाम मेरा रास्ता तकती रहे!
में नहीं चाहता कि,
मेरे हाथों पर ख़ून के निशान हों!!
में उन गंदे हाथों से अपनी मां के चेहरे को प्यार करूं!
में नहीं चाहता कि,
में अपनी मां के चेहरे को प्यार करने के लिए भी तरस जाऊं!
बस इसीलिए में ने चाहते हुए भी ऐसा बहुत कुछ जो नाकाबिले बर्दास्त नहीं है, लेकिन बर्दास्त कर जाता हूं!
शायद तुम खुशनसीब हो! कि
में अपनी मां की वजह से वेहशतज़दा (Aghast) रूप नहीं धार रहा हूं!
वरना बहुत सी कहानियां यहां शुरू करने से पहले ही ख़त्म कर दी जाती और तुम्हें खबर तक ना होती....!😞😔
~वाहियात फिलोसॉफर
तुम्हें पता है!
फिलॉसोफी🥰
तुम मेरा पांचवा पहलू, और मेरा दूसरा दिल हो!
और हुरूफ़-ए-तहज्जी (#Letters of alphabets) का इक्कीसवां हुर्फ़/अक्षर (#Letter) हो....
तुम मेरा तीसरा कंधा हो!
और हफ़्ते का आठवां दिन!मे
री ज़िन्दगी में सबकुछ तुम हो....!🥀🥰
~वाहियात फिलोसॉफर
बुधवार, 14 सितंबर 2022
Philosophy
नफशियात 📚
शायरियां📌
मेरे पास से जो गुज़री, मेरा हाल तक ना पूछा, में केसे मां जाऊं वो दूर जाकर रोई....
तेरे पास से जो गुज़रे रो जुनून में थे "फ़राज" जब दूर जाके सोचा, तो ज़ार-ज़ार रोई....!😞😔
~वाहियात शायर
Astronomy/ज्योतिष विज्ञान के अनुशार....
मंगलवार, 13 सितंबर 2022
तुम्हारी हंसी 🥰
फीलोसोफी आर्टिकल
रविवार, 11 सितंबर 2022
ये अफ़सोसनाक है....
तुम्हारी आवाज़!🖤
तुम्हारी आवाज़!
कई जानी-पहचानी आवाज़ों में से एक है
मेंने आवाज़ों को मेहसूस करना बहुत पहले सीख लिया था,
ये दिल वो दिमाग में रच-बस जाती हैं, किसी टेपरिकॉर्डर के जैसे
तुम्हारी आवाज़ भी दिल वो दिमाग में, एक कैसेट में फीड होकर रह गई हैं!
शायद! तुमको लगे ये बढ़ा चढ़ा कर बयान करना है,
लेकिन....
कुर्रा-ए-अर्ज़ (The globe of earth) पे कुछ अफ़राद (Members) ऐसे ज़रूर होंगे, जिनको तुम्हारी आवाज़ बीमारी मे शिफा बख़्श सके।
हो सकता है में भी उन चांद बीमारों में शामिल हूं....!🥀🖤
~वाहियात फिलोसॉफर
मसला ये भी है कि....
शनिवार, 10 सितंबर 2022
में जानना चाहता हूं.....
हाल-ऐ-दिल
रोना आया मोहब्बत पर....🥺🥺
उसकी सब बातें सुनकर जब अहसास हुआ कि उसको जाना ही है तो रोना आया मोहब्बत पर, हंसी आयी ख़ुद पर, रंज हुआ उसकी मजबूरियों पर, अफ़सोस हुआ अपने आप ...