सोमवार, 26 सितंबर 2022

एक दिन....!🥰

तुर्की के मोहर (Samp) लगे पासपोर्ट में, एक मेरे और रियाज़ नाम के पासपोर्ट की कमीं है।
एक दिन हम तुर्की ज़रूर जाएंगे!
तब वहां की फिज़ाओं में, बस मोहब्बत की महक होगी!
उस दिन नीली मस्जिद के सारे कबूतर ख़ुशी से रक्स करेंगे।
और तुर्की के सारे गुलदस्ते (Tulip's) ख़ुशी से खिल उठेंगे। और उस दिन वहां के बगुलों की ख़ुशी देखने लायक होगी।
वहां का हर ज़र्रा हमारा इस्तेकबाल (Welcome) करेगा।❤️😍

ऐ मोहब्बतों के शहर!
एक दिन तुम मेरी उल्फत (Love; The attitude that inspires someone to always be with or near him, considering him very good) से वाक़िफ हो जाओगे।
एक दिन हम ज़रूर आएंगे!👩🏻‍❤️‍👨🏻
तुर्की की सरजमीं पर अपने नक्श छोड़ने।
बस उस दिन का इंतज़ार है ज़िन्दगी....!🥺

~वाहियात फिलोसॉफर 

शनिवार, 24 सितंबर 2022

हो सकता है.....

हो सकता है!
तुम उसकी पहली, या फिर आख़री मोहब्बत ना हो,
ये भी हो सकता है कि, तुम उसकी इकलौती मोहब्बत ना हो,

ये भी तो हो सकता है, 
तुमसे पहले भी उसने, मोहब्बत की हो किसी से,
या उसको एक बार फिर, मोहब्बत हो जाए किसी से,

लेकिन गर् उसको आज मोहब्बत है तुमसे, तो फिर आज क्या चाहती हो तुम!
हो सकता है वो कामिल ना हो, लेकिन तुम भी कामिल कब हो,

हो सकता है तुम दोनों मिलकर भी कामिल ना बन पाओ कभी, 
लेकिन, गर् वो तुम्हारे होंठों पर हंसी ला सकता है, और जीने का गर् तुम्हें सिखला सकता है, और इंसानियत का अहसास तुम्हें दिला सकता है, और अपनी खामियों के बावजूद भी तुम्हारे संग चलने अहदे वफ़ा करता है....
फ़िर थम लो तुम हाथ उसका,
और जी भर के दो तुम, साथ उसका....!

हो सकता है वो हर लम्हा, तुम्हारे बारे में ना सोचता हो,
लेकिन फिर भी....
अपने दिल का एक हिस्सा गर् वो तुमको दे देता है, ये जानते हुए भी कि 
तुम उसको एक दिन तोड डालोगी....
अपने कदमों तले उसे रोंद डालोगी....!!

लेकिन तुम कुछ ऐसा करना कि.....
उसके दिल को तोड़ना मत
साथ उसका कभी तुम छोड़ना मत
अपना जो कुछ वो तुमको दे
उससे ज्यादा कुछ मांगना मत!!

मुस्कुरा दो!
जब खुशियां तुम पर बरसाए वो, बेशक बता दो जब तुम्हें बेज़ार करे वो

लेकिन अगर....
उससे अकीदत है तुमको, 
थोड़ी सी भी मोहब्बत है तुमको!

तो जिंदगी के अगर कभी, वो बिछड़ भी जाए तुमसे, उसको सदा याद रखना तुम....
और उसकी हंसी यादों को, दिल में अपने आबाद रखना तुम....!📚💐

~वाहियात फिलोसॉफर 

शुक्रवार, 23 सितंबर 2022

Invitation Graduational Ceremony 👨🏻‍🎓💐

Dear Mohammad Aashir Hussain
University Roll no. 1901****0091

Examination Roll No- 19******6971,

Sol registration- 19-1-16-054398

Username- @jamsheedariyaaz
Selected college on ceremony- Swami shraddhanad college (University of Delhi-110006)
Your Ceremony I'd-6973
Kindly follow the guidelines implemented by the university and enjoy the graduation ceremony.
You are invited to the Graduate Ceremony at University of Delhi.

Keeping in view the performance of your better exam results, invites you and the successful candidates in the final year examination of the year 2022.

University of Delhi Many many congratulations to all of you on behalf of the annual examination result and also best wishes for your good and golden future.

Hope you will imagine a better future after graduation from University of Delhi international Admissions
You have graced the college and university with good results.

We hope that you will achieve success with such hard work and dedication.
Delhi University Invitation to graduation ceremony will be sent to you by email, fax, or post.

Greetings to the graduation ceremony of the year 2022 and Delhi University wishes you all the best for your bright future.

~ Delhi University

बुधवार, 21 सितंबर 2022

ये कैसा.....

ये कैसा जुर्म-ऐ-उल्फत है!
अनाएं छोड़ भी जाएं तो, पछतावों के काले नाग हमको मार देते हैं!
लहू में ज़हर बनकर वेहशतें यूं दौड़ करती हैं कि सांसों का तसलसुल/उतार-चढ़ाव तो नहीं रहता! 
मेरा पीछे, बहुत पीछे किसी लम्हे की चोखट पर, 
हम अपनी ख्वाहिशों के दाम में आकर,
सभी जीवन की पूंजी वार देते हैं!
सभी कुछ हार देते हैं....!📚💐

~वाहियात फिलोसॉफर 

कुछ अनकहे तथ्य.....

सिकस्ता मकबरों पे टूटती रातों को एक लड़का बे-रब्त जोग़ में कुछ गुनगुनाता है!
कहा करते हैं चरवाहे कि.......!
जब रुकते हैं गीत उसके,
तो एक ताज़ा लहद से चीखों की आवाज़ आती है....!😓😪

~वाहियात फिलोसॉफर

मंगलवार, 20 सितंबर 2022

मुझे याद है....

मेहबूब के साथ बीता एक लम्हा भी इंसान कभी नहीं भूल सकता!
मुझे उसके साथ गुज़ारे हर लम्हे की एक-एक बात आज लफ्ज़ बा लफ्ज़ याद है।
वो मेरी किस बात पर मुस्कुराई, मेरी किस बात पर खफा रही!
मेरे किस सवाल पर उसने क्या जवाब दिया!
और मेरे किस सवाल ने उसे ख़ामोश कर दिया!
मुझे याद है जब वो कहती थी "तुम हंसते हुए बहुत प्यारे लगते हो!, नज़र ना लगे मेरी" अब एक मुद्दत हो गई हंसा नहीं हूं में....!
मुझे सब याद है, मुझे याद है जब उसे पहली बार देखा! मुझे याद है जब पहली बार उसे देखने पर दिल के जज़्बात मेहसूस किए! मुझे याद है जब खुशकिस्मती से पहली मुलाकात पर उस चाय का ज़ायका! मुझे याद है मुझे याद है उसका मोहब्बत के ज़ाहिर करने पर कुबुलियत का लम्हा, मुझे याद है जब मेने उसका थामा!
और आज भी मुझे उसका मजबूरियों की आड़ में हाथ छुड़ाना भी याद है!
मुझे याद हैं उसके बुलावे! 
लेकिन...!
मुझे उसका, मुझे इग्नोर करना और उसके हाफ्ज़े से ख़ुद को मिटता हुआ भी याद है!
मुझे याद है बदकिस्मती से सब याद है....!😔😞

~वाहियात फिलोसॉफर 

अनकहे जज़्बात 📚

सुनो!
ऐ दरियाए सिफ्त आंखों वाली शहरा मिजाज़ लड़की!
तुम बहुत खूबसूरत हो....!
मगर तुम जितनी भी खूबसूरत हो, "ज़िन्दगी" से ज्यादा खूबसूरत तो नहीं!
और में जितना भी बदसूरत हूं, "मेहरूमी" से ज्यादा नहीं...!
तुम इतनी खूबियों के बावजूद भी जब चाहो खुश नहीं हो सकती, और में
इतनी खामियों के बावजूद भी अपनी मर्ज़ी से,
उदास होने का हुनर रखता हूं....!🥀🖤

~वाहियात फिलोसॉफर

बिखरता वजूद😔

में अब तुमसे बात नहीं करता!
तुम्हें पुकारता भी नहीं हूं!
में नहीं कहता कि तुम्हें जब वक्त मिले तो मुझसे राब्ता क्यों नहीं करती!
में नहीं कहता अभी रुक जाओ! अभी मत जाओ!
मुझे नींद नहीं आ रही तो तुम भी मत सो!
में तो अब तुम्हारे सामने भी नहीं आता! जाने कब से मेने तुम्हें पुकारा नहीं, तुम्हें सदाएं नहीं दी! जाने कब से तुम्हें एक नज़र देखा नहीं!
तुम्हारा नाम लिया!
वो जो तुम्हें बेबाक नामों से पुकारा करता था, वो अब ख़ामोश है! बिल्कुल ख़ामोश!
तुमसे लड़ता भी नहीं!
कोई शिकवा ना ही कोई शिकायत, कुछ भी तो नहीं करता!
में अब कहां कहता हूं....
तुम सिर्फ़ मेरी हो! सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरी!
में अब कहां किसी से भी लड़ता हूं!
कहां किसी से भी छीनता हूं! कब किसी से कहता हूं कि तुमपे सिर्फ़ मेरा हक़ है!
सब कुछ छोड़ चुका हूं! यहां तक कि तुम्हें याद करना भी छोड़ दिया!
छोड़ दिया तुम्हें तुम्हारे हाल पर! छोड़ दिया तुमसे लड़ना झगड़ना!
हां मगर........
तुम आज भी मेरी दुआओं के दायरे में हो! अब भी आयत-उल-कुर्सी पढ़ कर तुम्हें दम करता हूं! अब भी कई कई घंटों तुम्हें सोचता हूं!
क्योंकि में आज भी तुमसे मोहब्बत करना नहीं छोड़ सका!
अब भी नहीं छोड़ सका तुम्हें चाहना, तुमसे मोहब्बत करना!
आज भी तुमसे मोहब्बत के मामले में शिद्दत पसंद हूं!
आज भी तुमसे मोहब्बत करने में वैसा ही जुनूनी हूं!
मगर अब ख़ामोश हूं!
बिल्कुल ख़ामोश....!😔😞

~वाहियात फिलोसॉफर 

अनकहे जज़्बात 📚

उसे कहना!
मोहब्बत में किसी को अपनी आदत डालकर यूं छोड़ देने पर, अचानक से ता'अल्लुक तोड देने पर....
यहां कानून, काज़ी और अदालत कुछ नहीं कहते! मगर....
ये कत्ल होता है!
उसे कहना मेरे क़ातिल!
जुदाई की कुदालों से जो तुमने क़ब्र खो दी थी, वहां में ख़ाक के नीचे अभी तक सो नहीं पाया....
ये ऐसा दाग है जिसकी अभी तक धो नहीं पाया....!!

उसे कहना....!
अगर वो लौट कर वापिस कभी आएं!
तो मेरी ख़ाक के ज़र्रों पे ये अहसान करना....
दोबारा फ़िर किसी इंसान की, 
हंसती दुनिया को ने वीरान करना....!!

उसे कहना.....!
वफ़ा के सर को कभी पत्थर से फोड़ा नहीं करते...
मोहब्बत डालकर दिल में, उसे तोड़ा नहीं करते....
किसी का हाथ थामो तो, उसे छोड़ा नहीं करते....!!😔😞

~वाहियात फिलोसॉफर

वाहियात फिलॉस्फी

जानता हूं कि, 
बहुत मशरूफ (Busy) हूं में आजकल!
और इन दिनों कुर्बत/नजदीकी (Nearness) बिल्कुल भी मुमकिन नहीं, लेकिन जब तुम मेरा लम्स खोने लगो!✨
मेरी आवाज़ का ज़ायका/स्वाद भूल जाओ!
तुम्हारे दिल की धड़कनें मेरे नाम पर तेज़ होना छोड़ दें!
और तुम्हारे हफ्ज़े (Memory) में मेरी मोहब्बत गायब होने लगे, तो जुदाई के जीतने से पहले....
मुझे एक बार आवाज़ दे लेना! 
में तुम्हारे पास लोट आऊंगा!
में यूं तुम्हारी तरफ़ आऊंगा, जैसे पानी ढलान से नीचे आता है।😍
हम ढेर सारी बातें करेंगे! 
और मेने तुम्हारे लिए एक फ़ूल ख़रीद रखा है! जिसे तुम्हारे बालों में सजाना है....!💐🥰

~वाहियात फिलोसॉफर

शायरी संग्रह

तुम्हारे दम कदम से थी ये सब मौसमों की रंगीनी, तुम्हारे बाद सारे साल मौसम सर्द रहता है....

तुम्हारे बाद बाकी और तो सब ठीक है, लेकिन! जहां दिल था कभी पहले, वहां अब दर्द रहता है....!😞😔

~वाहियात फिलोसॉफर📚

सयाने कहते हैं....

सयाने कहते हैं....
हर दरवाज़े पे मिन्नत और मन्नत नहीं चलती!
कुछ दर् बड़े मस्त होते हैं....
मर्ज़ी से खुलते हैं।
बस उस दर् पे अपने नाम की अर्जी (Application) लगाके आ जाओ! दर् वाले की नज़र पड़ेगी तो पुकार लेगा....
मन चाहा तो इनायत (Compassion) भी कर देगा! 
पड़े ना रहना!
ख़ुद को भिखारी ना बनाना! भीख़ से पेट पलता है, दिल नहीं....!📚💐

~वाहियात फिलोसॉफर

शनिवार, 17 सितंबर 2022

~वाहियात शायर💐

मुझे क्यों जान से ज्यादा पसंद है ये धुवां-धुवां सा मौसम, ये हिज़्र भरी शामें मुझे पसंद हैं तो क्यूं है....

में उजड़ के भी हूं तेरा, तू बिछड़ के भी है मेरा, ये यकीन है तो क्यूं है, ये ख्याल है तो क्यूं है....!🥀🖤

~वाहियात शायर💐

वो अक्सर मुझसे कहती थी....📚

वो अक्सर मुझसे कहती थी!

मुझे मत इस कदर चाहो, कि में एक आम सी/नॉर्मल लड़की हूं! तुम्हारी आदतों सी कोई भी आदत नहीं है मुझमें....✨

ना शे'र-ओ-शा'इरी से कुछ लगाव है, ना मौसम मेरे दिल को बहुत बेचैन करते हैं, ना बूंदों में मुझे मधुरता (Melodiousness) मेहसूस होती है, ना

मुझे चांद रातों का जादू पागल बनाता है! तुम्हारी आदतों सी कोई भी आदत नहीं है मुझ में! मुझे मत इस क़दर चाहो! वो अक्सर मुझसे कहती थी.....!

मगर!🍂

उसकी निगाहों से ये सच्चाई झलकती थी, अगर'चे एक भी आदत मेरी-उसकी नहीं मिलती मगर एक मुश्तरक (Common) जज़्बा जो हम में सांस लेता है, उसे मेहसूस होता है।🔥

उसे मेरी, मेरे होने, मेरी चाहत चाहत की आदत है! उसे मुझसे बहुत ज्यादा-बहुत ज्यादा मोहब्बत है।✨

मुझे वो आम, निर्मल सी लड़की बहुत ख़ास लगती है। जिसे ना शायरी से कुछ लगाव है और ना मौसम उसे बेचैन रखते हैं।✨

उसे केसे बताऊं में....

कि में लफ़्ज़ों में उसकी हर अदा तस्वीर (Imagine) करता हूं! में जो शायरी, आर्टिकल्स, फिलॉस्फी तहरीर करता हूं, उसे तहरीर करता हूं!🤩

मुझे उसके हर एक मौसम, हर एक आदत की आदत है....!

मुझे उससे बहुत ज्यादा-बहुत ज्यादा मोहब्बत है! में उसकी चाहता हूं तो मेरी तकमील (The act of completion) होती है।🥰

उसे ना चाहकर ख़ुद को अधूरा किस तरह कर लूं! 

में आख़िर किस तरह दिल को ग़मों की आग से भर लूं! उसे एक पल जो ना सोचूं, तो जैसे सांस रुक जाए! 

में केसे खुदकुशी कर लूं....!🥀💐


~वाहियात फिलोसॉफर 

शायरियां 📌

मेरे पास से जो गुज़री, मेरा हाल तक ना पूछा, में केसे मां जाऊं वो दूर जाकर रोई....

तेरे पास से जो गुज़रे रो जुनून में थे "फ़राज" जब दूर जाके सोचा, तो ज़ार-ज़ार रोई....!😞😔

~वाहियात शायर 

गुरुवार, 15 सितंबर 2022

अगर में....

अगर में तुम्हारे इश्क़ मे ज़िंदा रहा तो, में तुमसे कॉल पर बात नहीं करूंगा!
बल्कि इक्कीसवीं सदी के आख़िर में तुम्हें अपने कांपते हाथों से ख़त लिखूंगा।
तब जाने दुनिया कैसी होगी!
मेरे उस वक्त के लिखे हुए पुराने ख़त तब तक शायद अपनी अलग पहचान रखते हुए, किसी म्यूज़ियम में पड़े होंगे...
में बस तुम्हें इस लिए कॉल नहीं करूंगा, क्योंकि में जानता हूं तब भी तुम्हारी आवाज़ मुझे तुम्हारी तरफ खींचेगी!
और में कभी नहीं चाहूंगा, कि
में तेरे घर की दहलीज़ पर आकर अपनी आख़री सांस लूं....!
लेकिन हां शायद! 
वो आख़री ख़त तेरी दहलीज पर कोई बरसों से फ्री की सैलरी लेने वाला डाकिया पकड़ा जाए!
तुम उसे खोलकर पढ़ने की हिम्मत मत करना!
बस एक कप चाय पीते हुए उसे आग लगा देना!
क्योंकि उसमें बस.....
तुम्हारे और मेरे नाम के अलावा कुछ नहीं होगा....!📚💐

~वाहियात फिलोसॉफर 

में नहीं चाहता कि....

में नहीं चाहता कि,
मेरी मां हर शाम मेरा रास्ता तकती रहे!

में नहीं चाहता कि,
मेरे हाथों पर ख़ून के निशान हों!!
में उन गंदे हाथों से अपनी मां के चेहरे को प्यार करूं!
में नहीं चाहता कि,
में अपनी मां के चेहरे को प्यार करने के लिए भी तरस जाऊं!
बस इसीलिए में ने चाहते हुए भी ऐसा बहुत कुछ जो नाकाबिले बर्दास्त नहीं है, लेकिन बर्दास्त कर जाता हूं!
शायद तुम खुशनसीब हो! कि
में अपनी मां की वजह से वेहशतज़दा (Aghast) रूप नहीं धार रहा हूं!
वरना बहुत सी कहानियां यहां शुरू करने से पहले ही ख़त्म कर दी जाती और तुम्हें खबर तक ना होती....!😞😔

~वाहियात फिलोसॉफर 

तुम्हें पता है!

तुम्हें खबर है!
बस तुम्हारे मुंह से अदा हुए लफ़्ज़ मायने रखते हैं,
बाक़ी आवाज़ों को तो में शोर समझता हूं....!💐🥰

~वाहियात फिलोसॉफर

फिलॉसोफी🥰

तुम मेरा पांचवा पहलू, और मेरा दूसरा दिल हो!

और हुरूफ़-ए-तहज्जी (#Letters of alphabets) का इक्कीसवां हुर्फ़/अक्षर (#Letter) हो....

तुम मेरा तीसरा कंधा हो! 

और हफ़्ते का आठवां दिन!मे

री ज़िन्दगी में सबकुछ तुम हो....!🥀🥰

~वाहियात फिलोसॉफर 

बुधवार, 14 सितंबर 2022

Philosophy

कहा था ना....!
कि यूं सोते हुए मत छोड़ के जाना, मुझे बेशक जगा देना,
तुम्हें रास्ता बदलना है, मेरी हद से निकलना है, तुम्हें किस बात का डर था! 
में तुम्हें जाने नहीं देता, कहीं पे कैद कर लेता!

अरे पागल!

मोहब्बत की तबिय्यत के जबरदस्ती नहीं होती! 
जिसे रस्ता बदलना हो, उसे रास्ता बदलने से, जिसे हद से निकालना हो, उसे हद से निकलने से ना कोई रोक पाया है, ना कोई रोक पायेगा!
तो तुम्हें किस बात का डर था, 
मुझे बेशक जगा देते, में तुमको देख ही लेता! तुम्हें कोई दुआ देता! 
कम अज़ कम यूं तो ना होता, मेरे साथी ये हकीकत है।
तुम्हारे बाद खोने के लिए जो कुछ भी नहीं बाकी, मगर में खोने से डरता हूं, 
में अब सोने से डरता हूं, कहा था ना!
यूं छोड़ के ना जाना....!😞😔

~वाहियात फिलोसॉफर 

नफशियात 📚

नफशियात की नज़र से देखा जाए तो, 
अगर कोई सख्स हमसे बिछड़ जाता है तो उसे भुलाने में हमारा दिमाग (Brain) 21 दिन लेता है!
मगर नाफशियात का ये उसूल सिर्फ और सिर्फ दिमाग़ के लिए ही है....
जबकि दिल का कोई उसूल नहीं होता!
बात जब दिल के मामले पर आ टिके तब 21 साल भी कम पड़ जाया करते हैं....!📚📌

~वाहियात फिलोसॉफर 

शायरियां📌

मेरे पास से जो गुज़री, मेरा हाल तक ना पूछा, में केसे मां जाऊं वो दूर जाकर रोई....

तेरे पास से जो गुज़रे रो जुनून में थे "फ़राज" जब दूर जाके सोचा, तो ज़ार-ज़ार रोई....!😞😔

~वाहियात शायर

Astronomy/ज्योतिष विज्ञान के अनुशार....

माहिर-ऐ-फ़लकियात (Astronomy) कहते हैं कि,
अंतरिक्ष में हमारी गैलेक्सी के अलावा लगभग 2 बिलियन्स और गैलेक्सियां/ग्रह (Planet's) मौजूद हैं...
तुम्हारा वजूद 
एक मुकम्मल प्लैनेट/ग्रह (Planat) है 
इस कायनात की सबसे रोशन गैलेक्सी/ग्रह (Planet)....!💐🥰

~वाहियात फिलोसॉफरFacebook

मंगलवार, 13 सितंबर 2022

तुम्हारी हंसी 🥰

दुनिया राजनीतिक शासन में लगी हुई है!
और मुझे तुम्हारी हंसी नहीं भूली जा रही है, 
तुम्हारी हंसी....🥰
तमाम खूबसूरती और अमन पसंद (Peace-loving) मौसमों की इत्तेफ़ाक़न ख्वाहिशमंद हैं,
तुम यकीनन जीत जाओगी, 
तुम्हारे मुकाबले पर भी कोई नहीं है
और तुम सियासत में भी नहीं हो
तुम बहुत खूबसूरत हंसती हो।☺️
तुम्हारी हंसी मुझे अल्लाह पाक की रिवायात (Traditions) की याद दिलाती है....!
प्राचीन सहीफ़े (The religious book that was revealed to a prophet by Allah Ta'ala) में सुनहरी हेडलाइन्स में लिखित है कि....
वो कभी हिलाक/बर्बाद नहीं किए जाएंगे, जिनका वजूद उनका अदम (Life after death) है...!🖤
उनके लफ्ज़ कभी चोरी नहीं होंगे, 
जो आंखों से बोलते हैं और कानों से देखते हैं...!
और वो कभी रिजेक्ट नहीं होंगे, जो कभी इरादा पैश नहीं करते...!🤩
तुम्हारी हंसी बहादुरी पर नग्में और हथियार पर फ़ूल की फतेह (Success) की अलामत है।
हंसती रहना....
मुझे कुछ याद नहीं रहता!
और तुम्हारी हंसी में भूल नहीं रहा हूं....!😍💐

फीलोसोफी आर्टिकल

में देखता हूं 
कभी अपने वक्त पर 
या कभी बगैर दस्तक दिए
आफ़त की तरह छा जाने वाली सोचें
कभी कोई छोटा-बड़ा हादसा
किसी को बोलता देखकर
किसी को किसी का साथ छोड़ता देखकर
या अपनी ख़ामोशी और अल्फ़ाज़ के बांझपन से

कभी तखील से टूटने में
अल्हाम और अब्हाम के मुबहम (आसमां से दिल में किसी बात का या ख्यालों के आने पर ना समझ आने पर उनका अक्स) मिटते हुए
ख़ुद से बिछड़ते हुए, अपने लिए किल्लत का सामान बनते रहना।

आशनाई (#connection) से कट कर बेगानगी (#estrangement) अपनाने में 
अपने मे'यार (#Standard) और पैमाने की पैमाईश में
ज़र्फ़ (#Ability) को ख़ुद से जुदा कर देने में 
खुशहाली और शोभा/दिखावे के लालच में
सूरतें और सीरतें खत्म हुई जाती हैं।

झुंझलाहट और एक बेरहम सी थकन है
जिसमे सारी हिम्मत/जोश (#Energy, strength, power, ability, the power and ability by which a person can do something) बे मौत मारी का चुकी हैं।

किसी आस की तदफीन करते हुए, बाकी होंसले भी बास मार देते हैं।

जमाईयां लेते, खांसते और छींकते हुए 
किसी अधेड़ उम्र बीमार से
जो मौत की राह हमवार/समतल (#Equable) करना जानता हो
ज़िन्दगी कभी सर्गोशियां नहीं करती।

एक-आध् कोई दोस्त कुछ-कुछ जानने लगता है
आंख में मोहब्बत के ख़्वाब मगर दिखला नहीं पाता, 
या शायद बात ही सारी तवज्जो की है
कोई भी तो नहीं है, जिस तरह में सोचूं या वो भी मेरी तरह, मन वे तन अपने दिल की चलाते हैं।

भागदौड़ में उकताहट कंधों पर उठाए
सारे दिन दूसरे किरदार अदा करते हुए
शाम को चारपाई पे गिरने में 
एक अजीब सी पहेली के हाथ हैं

में बस देखता रह जाता हूं....!🥀🖤

~वाहियात फिलोसॉफर

रविवार, 11 सितंबर 2022

ये अफ़सोसनाक है....

ये अफ़सोसनाक है, मगर है सच
और में ऐतरा़फ़ करता हूं कि, मुझे दिल की ज़मीन पर आज भी ग़म के अचानक झटके महसूस होते हैं!
में एक से ज्यादा बार अलहेदगी/अलग होना बर्दाश्त कर चुका....
अब वो दोस्ती, मोहब्बत या किसी की मौत थी।
नुक़सान हो गए, वक्त गुज़र गया!
पर 
वो लम्हे मेरे दिल में ठहर गए, जिन्हें में साथ लिए फिरता हूं....!🥀🖤

~वाहियात फिलोसॉफर 

तुम्हारी आवाज़!🖤

तुम्हारी आवाज़!
कई जानी-पहचानी आवाज़ों में से एक है
मेंने आवाज़ों को मेहसूस करना बहुत पहले सीख लिया था,
ये दिल वो दिमाग में रच-बस जाती हैं, किसी टेपरिकॉर्डर के जैसे
तुम्हारी आवाज़ भी दिल वो दिमाग में, एक कैसेट में फीड होकर रह गई हैं!
शायद! तुमको लगे ये बढ़ा चढ़ा कर बयान करना है,
लेकिन....
कुर्रा-ए-अर्ज़ (The globe of earth) पे कुछ अफ़राद (Members) ऐसे ज़रूर होंगे, जिनको तुम्हारी आवाज़ बीमारी मे शिफा बख़्श सके।
हो सकता है में भी उन चांद बीमारों में शामिल हूं....!🥀🖤

~वाहियात फिलोसॉफर 

मसला ये भी है कि....

मसला ये भी है कि 
हम मिडिल क्लास लोगों पर मोहब्बत ना मिलने के असारात बहुत ज्यादा वेहशतनाक होते हैं, 
हम नफरतों के ज़हान में बड़े होते हुए कब मोहब्बत कर बैठते हैं हमें ख़ुद नहीं पता चलता है!
हमें इस बात को अंदाज़ा तब होता है जब हम मोहब्बत का ज़वाल (Loss) देखते हैं। 
मोहब्बत हमारे वजूद पर पहले-पहल तो ऐसे करामात/मोज़िजे (Supernatural powers, miracles) दिखाती है कि हमें ख़ुद के इंसान होने पर भी शक होने लगता है, शायद! ऐसे मेहसूस होता है कि जैसे किसी को बरसों बाद किसी दर्द से रिहाई मिली हो।
लेकिन जैसे ही मोहब्बत का ज़वाल आता है, हम नफ़रत सीखे हुए लोग ने तो मोहब्बत कर पाते और ना ही नफ़रत।
हमारा वजूद रोज ने जाने कितनी ही कशमकश/उलझनों(Complication) में से गुजरता है, खुदकुशी के हज़ारों ख्यालात हमारे ज़हन में घूमने के बावजूद हम ख़ुद की जात के बरअक्स(Opposite) मुस्कुरा रहे होते हैं।
मोहब्बत के ज़वाल का सबसे बड़ा मसला यही है कि हम ना तो किसी के रहते हैं ना ही अपनी ज़ात के।
मोहब्बत को लेकर हम आज तक कंफ्यूज रहे हैं, मोहब्बत भी शायद उन्ही के क़दम चूमती है, जो सबसे पहले अपनी ज़ात के साथ मुखलिश (Sincere) होते हैं। 
हम शायद! सबसे पहले यहीं ग़लती करते हैं कि, ख़ुद की ज़ात को लेकर अपने ख्यालात को इंकार (Disapproval) करने लग जाते हैं। मसला हमारा भी नहीं है शायद!
नफ़रत करने वाले सख्स को मोहब्बत पर अगर कभी यकीन आए तो, इल्हामी (revelatory वो बात जो बतौर अल्हाम मालूम हो, आसमानी)यकीन आता है, उसे मोहब्बत हमेशा ख़ुदा की इनायत (Gift) लगती है....!

~वाहियात फिलोसॉफर 

शनिवार, 10 सितंबर 2022

में जानना चाहता हूं.....

तुम और में किसी ख़्वाब में मिल सकते हैं!
में तुम्हें गले लगाकर अपने होंठों से, तुम्हारी गर्दन कि पैमाईश करना चाहता हूं।
में जानना चाहता हूं कि, 
कायनात का वज़ूद अगर बाहों में समा जाए तो कितने बरस तक उस पर हरारत का असर नहीं होता है।
में जानना चाहता हूं कि,
ख़ुदा की कुदरत के किन हिस्सों को हिसार (Circle) में लिया जाए तो पूरी कायनात का वजूद दरहम-ब्रहम हो सकता है....
दर हकीकत ऐसा कुछ नहीं है, 
में कुन के फैसले समझने से क़ासिर नाकाम (Unable) हूं, में तो बस तुम्हारे और मेरे दरमियान मोहब्बत पैदा करना चाहता हूं....
क्योंकि मुझे लगता है कि, हमारी रूहें आसमानी मोहब्बत में मुब्तिला ज़मीन पर उतरी हैं।
अगर ऐसा एक ख़्वाब भी मुमकिन नहीं है तो फिर नींद का मुझसे कोई वास्ता नहीं है....!🥀🖤

~वाहियात फिलोसॉफर

हाल-ऐ-दिल

में इंतेज़ार में हूं उस वक्त के, 
जब कोई आए ना आए, चला जाए, वक्त दे ना दे, बात करे ना करे ता'अल्लुक रखे ना रखे, मुझे कोई फ़र्क ना पड़े!
किसी का नज़रअंदाज़ करना दिमाग पर हथौड़े की तरह ना बरसे!
किसी की गैरमौजूदगी दिल को ना दहलाए, जो साथ रहे वो दिल में भी आबाद रहे और जो चला जाए वो याददाश्त तक से भी मिट जाए।
ये वक्त ना देने पर, या याद ना करने पर जो दिल में एक लहर सी उठती है, बस ये ना उठा करे!
ये जो अंदर ही अंदर गिरते आंसुए, और सांसे गले में अटकने लगती हैं,
बस ये कैफियत/हालत ना हुआ करे!
काश! के किसी प्यारे को अपनी तरफ़ ख़ुद से मुत्वज्जा ना करना पड़े!
काश! के कोई भी चाह बाकी ना रहे....!😞😔

~वाहियात फिलोसॉफर


रोना आया मोहब्बत पर....🥺🥺

उसकी सब बातें सुनकर जब अहसास हुआ कि उसको जाना ही है तो रोना आया मोहब्बत पर, हंसी आयी ख़ुद पर, रंज हुआ उसकी मजबूरियों पर, अफ़सोस हुआ अपने आप ...