मंगलवार, 11 अक्टूबर 2022

शायरी संग्रह 📚

बाद तेरे किसी का मेने ध्यान नहीं रखा, किसी की इज्ज़त नहीं की मान नहीं रखा....
यूं तो रहे दस्तरस में बहुत अज़ीज़ लोग भी, मगर तेरे बाद किसी का नाम जान नहीं रखा....!🥺🤕


~वाहियात फिलोसॉफर

सोमवार, 10 अक्टूबर 2022

में कहानियों....

में कहानियों, नॉविलों में अधूरे रह जाने वाले किरदारों पर बेतहाशा रोने वाला लड़का, ख़ुद भी अपनी ज़िन्दगी के एक मोड़ पर चुप-चाप मर जाऊंगा....!🥺😥

~वाहियात फिलोसॉफर 

शायरी संग्रह 📚

हस्ती मेरी, लोगों को गवारा नहीं, लेकिन एक आंख का तारा हूं ज़रा सोच के मिलना....
क़ुरआन ने मेरे बारे में "वल असर (val-Asr)" पुकारा, यानी में खसारा हूं, ज़रा सोच के मिलना....!🥺😔

~वाहियात फिलोसॉफर 

मेंने तुम्हें📌

मेंने तुम्हें खोने के डर से ज़िन्दगी को कभी आसान नहीं होने दिया....
में नहीं चाहता कि अगर कभी हम जुदा हो जाएं तो में आसान ज़िन्दगी गुजारते हुए हर रोज़ तुम्हारी यादों के हाथों तबाह होता रहूं!
में हमेशा ज़िन्दगी से उलझता रहना चाहता हूं ताकि तुम्हारा दर्द मुझसे मेरा वजूद ना छीन सके!
मगर.....!🥺😥

~वाहियात फिलोसॉफर 

शनिवार, 8 अक्टूबर 2022

अनकहे जज़्बात 📚

सूखे पत्तों पे लिखी मोहब्बत की वो दास्तान जिसका कोई अंजाम नहीं,
जो दिलों मदफून है,
जिसका बोझ उठाए मारे-मारे फिरते हैं,
इस आस पे कि शायद इस दास्तान का दूसरा हिस्सा मिल जाए, और कहानी मुकम्मल हो जाए....!🥀🖤

~वाहियात फिलोसॉफर

तुम मेरी....📌

तुम मेरी आंखों में देख कर बता सकती हो,
कि तन्हाई कितनी गहरी है!
उदासी का पैरामीटर क्या है?
एक दर्द का त'ईन मुमकिन है?
एक मुस्कुराहट के लिए कितने जतन करने होंगे?
किसी की यादों से छुटकारा पाने के लिए कौन सा नशा काफ़ी है?
क्या तुम मेरी आंखों में देख कर अंदाज़ा लगा सकती हो, कि हम कितनी बार मर सकते हैं? मौत कितनी बार आ सकती है....!🥺😥

~वाहियात फिलोसॉफर

अनकहे जज़्बात📌

मेंने अपने गुस्से के साथ एक लंबा अरसा बिताया,
और फिर काफी पुख्ता दोस्ती होने के बाद एक उसने मुझे बताया कि.....
इस का असल नाम दुख है....!🥺😥

~वाहियात फिलोसॉफर

तुम्हारे बाद📚

तुम्हारे बाद किसी कम सुख्न ने वहशत में, बुझा के सारे दिए आइनों से बातें की....
पलटने वाले से ये पूछना नहीं बनता, कहां गुजारे मेरे दिन, कहां पे रातें की....!🥺😥

~वाहियात शायर

रोना आया मोहब्बत पर....🥺🥺

उसकी सब बातें सुनकर जब अहसास हुआ कि उसको जाना ही है तो रोना आया मोहब्बत पर, हंसी आयी ख़ुद पर, रंज हुआ उसकी मजबूरियों पर, अफ़सोस हुआ अपने आप ...