में तुम्हें गले लगाकर अपने होंठों से, तुम्हारी गर्दन कि पैमाईश करना चाहता हूं।
में जानना चाहता हूं कि,
कायनात का वज़ूद अगर बाहों में समा जाए तो कितने बरस तक उस पर हरारत का असर नहीं होता है।
में जानना चाहता हूं कि,
ख़ुदा की कुदरत के किन हिस्सों को हिसार (Circle) में लिया जाए तो पूरी कायनात का वजूद दरहम-ब्रहम हो सकता है....
दर हकीकत ऐसा कुछ नहीं है,
में कुन के फैसले समझने से क़ासिर नाकाम (Unable) हूं, में तो बस तुम्हारे और मेरे दरमियान मोहब्बत पैदा करना चाहता हूं....
क्योंकि मुझे लगता है कि, हमारी रूहें आसमानी मोहब्बत में मुब्तिला ज़मीन पर उतरी हैं।
अगर ऐसा एक ख़्वाब भी मुमकिन नहीं है तो फिर नींद का मुझसे कोई वास्ता नहीं है....!🥀🖤
~वाहियात फिलोसॉफर
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