ऐ दरियाए सिफ्त आंखों वाली शहरा मिजाज़ लड़की!
तुम बहुत खूबसूरत हो....!
मगर तुम जितनी भी खूबसूरत हो, "ज़िन्दगी" से ज्यादा खूबसूरत तो नहीं!
और में जितना भी बदसूरत हूं, "मेहरूमी" से ज्यादा नहीं...!
तुम इतनी खूबियों के बावजूद भी जब चाहो खुश नहीं हो सकती, और में
इतनी खामियों के बावजूद भी अपनी मर्ज़ी से,
उदास होने का हुनर रखता हूं....!🥀🖤
~वाहियात फिलोसॉफर
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