गुरुवार, 15 सितंबर 2022

फिलॉसोफी🥰

तुम मेरा पांचवा पहलू, और मेरा दूसरा दिल हो!

और हुरूफ़-ए-तहज्जी (#Letters of alphabets) का इक्कीसवां हुर्फ़/अक्षर (#Letter) हो....

तुम मेरा तीसरा कंधा हो! 

और हफ़्ते का आठवां दिन!मे

री ज़िन्दगी में सबकुछ तुम हो....!🥀🥰

~वाहियात फिलोसॉफर 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

रोना आया मोहब्बत पर....🥺🥺

उसकी सब बातें सुनकर जब अहसास हुआ कि उसको जाना ही है तो रोना आया मोहब्बत पर, हंसी आयी ख़ुद पर, रंज हुआ उसकी मजबूरियों पर, अफ़सोस हुआ अपने आप ...