मुझे उसके साथ गुज़ारे हर लम्हे की एक-एक बात आज लफ्ज़ बा लफ्ज़ याद है।
वो मेरी किस बात पर मुस्कुराई, मेरी किस बात पर खफा रही!
मेरे किस सवाल पर उसने क्या जवाब दिया!
और मेरे किस सवाल ने उसे ख़ामोश कर दिया!
मुझे याद है जब वो कहती थी "तुम हंसते हुए बहुत प्यारे लगते हो!, नज़र ना लगे मेरी" अब एक मुद्दत हो गई हंसा नहीं हूं में....!
मुझे सब याद है, मुझे याद है जब उसे पहली बार देखा! मुझे याद है जब पहली बार उसे देखने पर दिल के जज़्बात मेहसूस किए! मुझे याद है जब खुशकिस्मती से पहली मुलाकात पर उस चाय का ज़ायका! मुझे याद है मुझे याद है उसका मोहब्बत के ज़ाहिर करने पर कुबुलियत का लम्हा, मुझे याद है जब मेने उसका थामा!
और आज भी मुझे उसका मजबूरियों की आड़ में हाथ छुड़ाना भी याद है!
मुझे याद हैं उसके बुलावे!
लेकिन...!
मुझे उसका, मुझे इग्नोर करना और उसके हाफ्ज़े से ख़ुद को मिटता हुआ भी याद है!
मुझे याद है बदकिस्मती से सब याद है....!😔😞
~वाहियात फिलोसॉफर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें