बुधवार, 14 सितंबर 2022

Philosophy

कहा था ना....!
कि यूं सोते हुए मत छोड़ के जाना, मुझे बेशक जगा देना,
तुम्हें रास्ता बदलना है, मेरी हद से निकलना है, तुम्हें किस बात का डर था! 
में तुम्हें जाने नहीं देता, कहीं पे कैद कर लेता!

अरे पागल!

मोहब्बत की तबिय्यत के जबरदस्ती नहीं होती! 
जिसे रस्ता बदलना हो, उसे रास्ता बदलने से, जिसे हद से निकालना हो, उसे हद से निकलने से ना कोई रोक पाया है, ना कोई रोक पायेगा!
तो तुम्हें किस बात का डर था, 
मुझे बेशक जगा देते, में तुमको देख ही लेता! तुम्हें कोई दुआ देता! 
कम अज़ कम यूं तो ना होता, मेरे साथी ये हकीकत है।
तुम्हारे बाद खोने के लिए जो कुछ भी नहीं बाकी, मगर में खोने से डरता हूं, 
में अब सोने से डरता हूं, कहा था ना!
यूं छोड़ के ना जाना....!😞😔

~वाहियात फिलोसॉफर 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

रोना आया मोहब्बत पर....🥺🥺

उसकी सब बातें सुनकर जब अहसास हुआ कि उसको जाना ही है तो रोना आया मोहब्बत पर, हंसी आयी ख़ुद पर, रंज हुआ उसकी मजबूरियों पर, अफ़सोस हुआ अपने आप ...