तुम उसकी पहली, या फिर आख़री मोहब्बत ना हो,
ये भी हो सकता है कि, तुम उसकी इकलौती मोहब्बत ना हो,
ये भी तो हो सकता है,
तुमसे पहले भी उसने, मोहब्बत की हो किसी से,
या उसको एक बार फिर, मोहब्बत हो जाए किसी से,
लेकिन गर् उसको आज मोहब्बत है तुमसे, तो फिर आज क्या चाहती हो तुम!
हो सकता है वो कामिल ना हो, लेकिन तुम भी कामिल कब हो,
हो सकता है तुम दोनों मिलकर भी कामिल ना बन पाओ कभी,
लेकिन, गर् वो तुम्हारे होंठों पर हंसी ला सकता है, और जीने का गर् तुम्हें सिखला सकता है, और इंसानियत का अहसास तुम्हें दिला सकता है, और अपनी खामियों के बावजूद भी तुम्हारे संग चलने अहदे वफ़ा करता है....
फ़िर थम लो तुम हाथ उसका,
और जी भर के दो तुम, साथ उसका....!
हो सकता है वो हर लम्हा, तुम्हारे बारे में ना सोचता हो,
लेकिन फिर भी....
अपने दिल का एक हिस्सा गर् वो तुमको दे देता है, ये जानते हुए भी कि
तुम उसको एक दिन तोड डालोगी....
अपने कदमों तले उसे रोंद डालोगी....!!
लेकिन तुम कुछ ऐसा करना कि.....
उसके दिल को तोड़ना मत
साथ उसका कभी तुम छोड़ना मत
अपना जो कुछ वो तुमको दे
मुस्कुरा दो!
जब खुशियां तुम पर बरसाए वो, बेशक बता दो जब तुम्हें बेज़ार करे वो
लेकिन अगर....
उससे अकीदत है तुमको,
थोड़ी सी भी मोहब्बत है तुमको!
तो जिंदगी के अगर कभी, वो बिछड़ भी जाए तुमसे, उसको सदा याद रखना तुम....
और उसकी हंसी यादों को, दिल में अपने आबाद रखना तुम....!📚💐
~वाहियात फिलोसॉफर
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