शनिवार, 10 सितंबर 2022

हाल-ऐ-दिल

में इंतेज़ार में हूं उस वक्त के, 
जब कोई आए ना आए, चला जाए, वक्त दे ना दे, बात करे ना करे ता'अल्लुक रखे ना रखे, मुझे कोई फ़र्क ना पड़े!
किसी का नज़रअंदाज़ करना दिमाग पर हथौड़े की तरह ना बरसे!
किसी की गैरमौजूदगी दिल को ना दहलाए, जो साथ रहे वो दिल में भी आबाद रहे और जो चला जाए वो याददाश्त तक से भी मिट जाए।
ये वक्त ना देने पर, या याद ना करने पर जो दिल में एक लहर सी उठती है, बस ये ना उठा करे!
ये जो अंदर ही अंदर गिरते आंसुए, और सांसे गले में अटकने लगती हैं,
बस ये कैफियत/हालत ना हुआ करे!
काश! के किसी प्यारे को अपनी तरफ़ ख़ुद से मुत्वज्जा ना करना पड़े!
काश! के कोई भी चाह बाकी ना रहे....!😞😔

~वाहियात फिलोसॉफर


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