हर दरवाज़े पे मिन्नत और मन्नत नहीं चलती!
कुछ दर् बड़े मस्त होते हैं....
मर्ज़ी से खुलते हैं।
बस उस दर् पे अपने नाम की अर्जी (Application) लगाके आ जाओ! दर् वाले की नज़र पड़ेगी तो पुकार लेगा....
मन चाहा तो इनायत (Compassion) भी कर देगा!
पड़े ना रहना!
ख़ुद को भिखारी ना बनाना! भीख़ से पेट पलता है, दिल नहीं....!📚💐
~वाहियात फिलोसॉफर
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