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मंगलवार, 20 सितंबर 2022

अनकहे जज़्बात 📚

सुनो!
ऐ दरियाए सिफ्त आंखों वाली शहरा मिजाज़ लड़की!
तुम बहुत खूबसूरत हो....!
मगर तुम जितनी भी खूबसूरत हो, "ज़िन्दगी" से ज्यादा खूबसूरत तो नहीं!
और में जितना भी बदसूरत हूं, "मेहरूमी" से ज्यादा नहीं...!
तुम इतनी खूबियों के बावजूद भी जब चाहो खुश नहीं हो सकती, और में
इतनी खामियों के बावजूद भी अपनी मर्ज़ी से,
उदास होने का हुनर रखता हूं....!🥀🖤

~वाहियात फिलोसॉफर

अनकहे जज़्बात 📚

उसे कहना!
मोहब्बत में किसी को अपनी आदत डालकर यूं छोड़ देने पर, अचानक से ता'अल्लुक तोड देने पर....
यहां कानून, काज़ी और अदालत कुछ नहीं कहते! मगर....
ये कत्ल होता है!
उसे कहना मेरे क़ातिल!
जुदाई की कुदालों से जो तुमने क़ब्र खो दी थी, वहां में ख़ाक के नीचे अभी तक सो नहीं पाया....
ये ऐसा दाग है जिसकी अभी तक धो नहीं पाया....!!

उसे कहना....!
अगर वो लौट कर वापिस कभी आएं!
तो मेरी ख़ाक के ज़र्रों पे ये अहसान करना....
दोबारा फ़िर किसी इंसान की, 
हंसती दुनिया को ने वीरान करना....!!

उसे कहना.....!
वफ़ा के सर को कभी पत्थर से फोड़ा नहीं करते...
मोहब्बत डालकर दिल में, उसे तोड़ा नहीं करते....
किसी का हाथ थामो तो, उसे छोड़ा नहीं करते....!!😔😞

~वाहियात फिलोसॉफर

शायरी संग्रह

तुम्हारे दम कदम से थी ये सब मौसमों की रंगीनी, तुम्हारे बाद सारे साल मौसम सर्द रहता है....

तुम्हारे बाद बाकी और तो सब ठीक है, लेकिन! जहां दिल था कभी पहले, वहां अब दर्द रहता है....!😞😔

~वाहियात फिलोसॉफर📚

गुरुवार, 15 सितंबर 2022

फिलॉसोफी🥰

तुम मेरा पांचवा पहलू, और मेरा दूसरा दिल हो!

और हुरूफ़-ए-तहज्जी (#Letters of alphabets) का इक्कीसवां हुर्फ़/अक्षर (#Letter) हो....

तुम मेरा तीसरा कंधा हो! 

और हफ़्ते का आठवां दिन!मे

री ज़िन्दगी में सबकुछ तुम हो....!🥀🥰

~वाहियात फिलोसॉफर 

रोना आया मोहब्बत पर....🥺🥺

उसकी सब बातें सुनकर जब अहसास हुआ कि उसको जाना ही है तो रोना आया मोहब्बत पर, हंसी आयी ख़ुद पर, रंज हुआ उसकी मजबूरियों पर, अफ़सोस हुआ अपने आप ...