गुरुवार, 15 सितंबर 2022

में नहीं चाहता कि....

में नहीं चाहता कि,
मेरी मां हर शाम मेरा रास्ता तकती रहे!

में नहीं चाहता कि,
मेरे हाथों पर ख़ून के निशान हों!!
में उन गंदे हाथों से अपनी मां के चेहरे को प्यार करूं!
में नहीं चाहता कि,
में अपनी मां के चेहरे को प्यार करने के लिए भी तरस जाऊं!
बस इसीलिए में ने चाहते हुए भी ऐसा बहुत कुछ जो नाकाबिले बर्दास्त नहीं है, लेकिन बर्दास्त कर जाता हूं!
शायद तुम खुशनसीब हो! कि
में अपनी मां की वजह से वेहशतज़दा (Aghast) रूप नहीं धार रहा हूं!
वरना बहुत सी कहानियां यहां शुरू करने से पहले ही ख़त्म कर दी जाती और तुम्हें खबर तक ना होती....!😞😔

~वाहियात फिलोसॉफर 

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