रविवार, 11 सितंबर 2022

ये अफ़सोसनाक है....

ये अफ़सोसनाक है, मगर है सच
और में ऐतरा़फ़ करता हूं कि, मुझे दिल की ज़मीन पर आज भी ग़म के अचानक झटके महसूस होते हैं!
में एक से ज्यादा बार अलहेदगी/अलग होना बर्दाश्त कर चुका....
अब वो दोस्ती, मोहब्बत या किसी की मौत थी।
नुक़सान हो गए, वक्त गुज़र गया!
पर 
वो लम्हे मेरे दिल में ठहर गए, जिन्हें में साथ लिए फिरता हूं....!🥀🖤

~वाहियात फिलोसॉफर 

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