वो अक्सर मुझसे कहती थी!
मुझे मत इस कदर चाहो, कि में एक आम सी/नॉर्मल लड़की हूं! तुम्हारी आदतों सी कोई भी आदत नहीं है मुझमें....✨
ना शे'र-ओ-शा'इरी से कुछ लगाव है, ना मौसम मेरे दिल को बहुत बेचैन करते हैं, ना बूंदों में मुझे मधुरता (Melodiousness) मेहसूस होती है, ना
मुझे चांद रातों का जादू पागल बनाता है! तुम्हारी आदतों सी कोई भी आदत नहीं है मुझ में! मुझे मत इस क़दर चाहो! वो अक्सर मुझसे कहती थी.....!
मगर!🍂
उसकी निगाहों से ये सच्चाई झलकती थी, अगर'चे एक भी आदत मेरी-उसकी नहीं मिलती मगर एक मुश्तरक (Common) जज़्बा जो हम में सांस लेता है, उसे मेहसूस होता है।🔥
उसे मेरी, मेरे होने, मेरी चाहत चाहत की आदत है! उसे मुझसे बहुत ज्यादा-बहुत ज्यादा मोहब्बत है।✨
मुझे वो आम, निर्मल सी लड़की बहुत ख़ास लगती है। जिसे ना शायरी से कुछ लगाव है और ना मौसम उसे बेचैन रखते हैं।✨
उसे केसे बताऊं में....
कि में लफ़्ज़ों में उसकी हर अदा तस्वीर (Imagine) करता हूं! में जो शायरी, आर्टिकल्स, फिलॉस्फी तहरीर करता हूं, उसे तहरीर करता हूं!🤩
मुझे उसके हर एक मौसम, हर एक आदत की आदत है....!
मुझे उससे बहुत ज्यादा-बहुत ज्यादा मोहब्बत है! में उसकी चाहता हूं तो मेरी तकमील (The act of completion) होती है।🥰
उसे ना चाहकर ख़ुद को अधूरा किस तरह कर लूं!
में आख़िर किस तरह दिल को ग़मों की आग से भर लूं! उसे एक पल जो ना सोचूं, तो जैसे सांस रुक जाए!
में केसे खुदकुशी कर लूं....!🥀💐
~वाहियात फिलोसॉफर
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