एक दिन हम तुर्की ज़रूर जाएंगे!
तब वहां की फिज़ाओं में, बस मोहब्बत की महक होगी!
उस दिन नीली मस्जिद के सारे कबूतर ख़ुशी से रक्स करेंगे।
और तुर्की के सारे गुलदस्ते (Tulip's) ख़ुशी से खिल उठेंगे। और उस दिन वहां के बगुलों की ख़ुशी देखने लायक होगी।
वहां का हर ज़र्रा हमारा इस्तेकबाल (Welcome) करेगा।❤️😍
ऐ मोहब्बतों के शहर!
एक दिन तुम मेरी उल्फत (Love; The attitude that inspires someone to always be with or near him, considering him very good) से वाक़िफ हो जाओगे।
एक दिन हम ज़रूर आएंगे!👩🏻❤️👨🏻
तुर्की की सरजमीं पर अपने नक्श छोड़ने।
बस उस दिन का इंतज़ार है ज़िन्दगी....!🥺
~वाहियात फिलोसॉफर
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