बुधवार, 21 सितंबर 2022

ये कैसा.....

ये कैसा जुर्म-ऐ-उल्फत है!
अनाएं छोड़ भी जाएं तो, पछतावों के काले नाग हमको मार देते हैं!
लहू में ज़हर बनकर वेहशतें यूं दौड़ करती हैं कि सांसों का तसलसुल/उतार-चढ़ाव तो नहीं रहता! 
मेरा पीछे, बहुत पीछे किसी लम्हे की चोखट पर, 
हम अपनी ख्वाहिशों के दाम में आकर,
सभी जीवन की पूंजी वार देते हैं!
सभी कुछ हार देते हैं....!📚💐

~वाहियात फिलोसॉफर 

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